डाक दिवस

डाक पूरे विश्व में एक बहुत ही उपयोग खोज साबित हुई है । कई माध्यमों से डाक का उपयोग प्राचीन काल से उपयोग होता आ रहा है मगर भारत में एक सुशासित डाक विभाग की स्थापना लार्ड क्लाइव द्वारा 1766 में की गई थी । इससे पहले के समय में कबूतरों का उपयोग चिट्ठी या संदेश भेजने के लिए किया जाता था यह एक तरह की डाक ही है। राजा महाराजाओं द्वारा भी कबूतरों का उपयोग का इतिहास में वर्णन मिलता है इसके अलावा राजा महाराजाओं के लिए इस कार्य के लिए खास व्यक्ति भी रहते थे । 

कबतरों द्वारा संदेश भेजने से कबूतरों के खो जाने अन्यथा गलत हाथों तक पहुंचने का भी खतरा रहता था । इसके अलावा किसी गैर भरोसेमंद व्यक्ति द्वारा भी डाल भेजना असुरक्षित था ।

जब अंग्रेज भारत में शासन कर रहे थे तब उन्हें इस चीज की जरूरत पड़ी और 1766 में लार्ड क्लाइव द्वारा डाक सेवा की शुरुवात की गई । कुछ वर्षों पश्चात सन् 1774 में वॉरेन हेस्टिंग्स द्वारा कोलकाता में प्रथम पोस्ट ऑफिस/ डाक घर की स्थापना की गई । लगभग 70 वर्षों पश्चात 1852 में स्टाम्प टिकट भी सुरु हो गई थी । समय के साथ साथ डाक विभव में अनेकों बदलाव किए गए और आज भारत में डाक विभाग बड़े ही सुचारू रूप से संचालित हो रही है । भारत में डाक विभाग की स्थापना हुए कई साल गुजर गए हैं और इसकी उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए विश्व और भारत दोनों में डाक दिवस मनाया जाता है ।

विश्व डाक दिवस की कल्पना 9 अक्टूबर 1874 में " यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन" के गठन के समय स्विट्ज़रलैंड में 22 देशों के हस्ताक्षर द्वारा 9 अक्टूबर के दिन को विश्व डाक दिवस मनाने के लिए चुना गया, 2 वर्षों पश्चात 1 जुलाई 1876 को भारत भी इस यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन में सम्मिलित हो गया । आज भारत के लगभग सभी गांव को इस सुविधा से जोड़ा जा चुका है, कुछ गांव अभी भी इससे नहीं जुड़ पाईं है हो सकता है इन्हे जुड़ने के लिए थोड़ा और समय लग जाए । भारत में लाखों पोस्ट ऑफिस की स्थापना की जा चुकी है ताकि पोस्ट सही समय में पहुंच जाए । 1852 में पहली बार चिट्ठी में डाक टिकट लगाना सुरु हुआ ।

वर्तमान में भारत में पोस्ट ऑफिस की संख्या 155,015 है तथा लगभग 40 हजार के आस पास पिन कोड मौजूद हैं । डाक विभाग डाक पहुंचाने के अलावा पोस्ट पेमेंट बैंक और जीवन बीमा जैसे योजनाओं का सुरूवात भी किया है । सामान्य डाक को पहुंचने में 1 हप्ता से 1 महीना का समय लग सकता है इसलिए डाल को जल्द से जल्द पहुंचाने के लिए स्पीड पोस्ट की स्थापना की गई जिसमें उसी दिन से लेकर 1 हप्ते के अंदर लगभग अधिकतर पोस्ट पहुंच जाती है ।


डाक दिवस कब मनाया जाता है 


विश्व डाक दिवस / अंतरराष्ट्रीय डाक दिवस - 9 अक्टूबर

भारतीय डाक दिवस - 10 अक्टूबर

9 से 14 अक्टूबर तक भारतीय डाक सप्ताह मनाया जाता है ।


प्रमुख देशों में डाक सेवा की शुरुवात


• ब्रिटेन में रॉयल मेल के नाम से डाक की शुरुवात 1516 में हुई जिसका मुख्यालय इंग्लैंड में है ।

• अमेरिका में यूएस मेल नामक डाक विभाग की स्थापना 1775 में हुई थी । 

• फ्रांस में " ला पोस्ट ए" नामक डाक विभाग की स्थापना 1576 में हुई थी जिसका मुख्यालय पेरिस में स्थित है ।

• जर्मन में डूटस्चे पोस्ट नामक डाक विभाग की स्थापना 1995 में हुई थी  जिसका मुख्यालय बॉन में है । 

• पाकिस्तान में पाकिस्तान डाक नामक डाक विभाग 1947 में स्थापित की गई जिसका हेडक्वार्टर इस्लामाबाद में है ।

• श्रीलंका का श्रीलंका पोस्ट डाक विभाग 1882 में स्थापित हुई जिसका हेडक्वार्टर कोलंबो में है ।


भारत में अन्य डाक सेवाएं 


मनी ऑर्डर - 1880 

स्पीड पोस्ट - 1986

भारतीय पोस्ट पेमेंट बैंक - 1 सितंबर 2018

भारतीय डाक जीवन बीमा - 1 फरवरी 1884


डिजिटलीकरण का डाक पर प्रभाव 


बदलते वक्त के साथ विश्व में अनेकों बदलाव हो रहा है जिसका प्रभाव डाक विभाग पर पड़ रहा है । डाक विभाग पर सबसे ज्यादा प्रभाव डिजिटलीकरण का पड़ा है । इस डिजिटलीकरण में मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट, मोबाइल तथा कंप्यूटर आदि प्रमुख हैं इनका डाक विभाग में निम्न प्रभाव पड़ा -


1. मोबाइल में मेसेज सुविधा तथा सोशल मीडिया एप्लिकेशन के आ जाने से चिट्ठी भेजने की प्रथा समाप्त हो गई है । लोक सोशल मीडिया और मेसेज के द्वार एक दूसरे को संदेश भेज रहे हैं ।

2. ऑनलाइन पेमेंट सुविधा आ जाने से अब मनी ऑर्डर भी बहुत कम हो गई है ।

3. आजकल इंटरनेट के माध्यम से लोग कुछ घंटों में ही ढेर सारे लोगों को आवश्यक दस्तावेज भेज रहे हैं जिसकी वजह से सरकारी दस्तावेजों को भेजने में डाक का उपयोग कम हो गया है ।

4. परीक्षाओं के लिए प्रवेश पत्र सीधे इंटरनेट से प्राप्त हो जाने के कारण डाक का उपयोग कम हो गया है ।


विभिन्न प्रभावों के बावजूद भी डाक आज और भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है । विभिन्न कार्यों का समन्वय इसके द्वारा है संभव है । डाक हमारे लिए महत्वपूर्ण था, है और रहेगा । डाक दिवस इसकी उपयोगिता को समझते हुए ही मनाया जाता है ।

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